120 Bahadur Review: हिम्मत, जज़्बे और बलिदान की सच्ची कहानी

120 Bahadur Review: हिम्मत, जज़्बे और बलिदान की सच्ची कहानी

120 Bahadur Review In Hindi:

यह एक ऐसी फिल्म है, जो देश भक्ति, त्याग, कर्तव्य और मानवीय भावनाओं को एक साथ निभाती है। ये फिल्म यूएन 120 जांबाज सैनिकों की कहानी को सामने लाती है जो अपने परिवार, अपने सपने और डर को पीछे छोड़कर अपने देश की रक्षा के लिए सीमा पर हर हमेशा खरे रहते हैं और दुश्मनों से लड़ते हैं। लेकिन इसका मुख्य फोकस सिर्फ गोली बारूद नहीं बल्कि सैनिकों की मानसिकता, उनकी दुविधाएं और देश के लिए उनके जज्बे पर बनी है।

कहानी:

फिल्म की कहानी एक रेजिमेंट पर केंद्रित है, जिसमें 120 सैनिकों को एक बेहद मुश्किल मिशन पर भेजा जाता है। हाँ मिशन ना केवल खतरनाक है बाल्की बहुत ही ज्यादा रननीति रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। पड़ोसी देश ने सीमा पर घुसपैठ की योजना बनाई है और इन 120 सैनिकों के कंधे पर हजारों जिंदगी की सुरक्षा टिकी हुई है। कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन अर्जुन सिंह जो मुख्य किरदार निभाए हैं। अपनी टीम के साथ कथिन इलाकों से गुजरता है – बहुत ही ज्यादा घने जंगल, बर्फ से ढकी पहाड़ों की चोटियां और दुश्मनों के छिपे हुए ठिकाने। इन परिस्थितियों में कहानी का मुख्य टकराव शुरू हो जाता है। फिल्म दिखती है कि कैसे यह सैनिक संसाधनों के कमी खराब मौसम और दुश्मन के लगातार हम लोगों के विवादित मिशन को पूरा करने के लिए अपने दम लगा देते हैं और हिम्मत हौसला के साथ आगे बढ़ते हैं।

कहानी में भावनाओं को तार का तब आता है जब सैनिकों को अपने घर से आए कुछ आखिरी मैसेज यानी चिट्टियां और यादें दिखाई जाती हैं। इससे दर्शक समझ पाते हैं कि एक सैनिक की सिर्फ वर्दी ही नहीं एक बेटा पति पत्नी और दोस्त भी होता है।

निर्देश (Direction):

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका निर्देश ही है। निर्देशक ने युद्ध को ग्लैमराइज नहीं किया बल्कि विकास से बहुत करीब लाकर दिखाया है। खास बात यह है कि कैमरे में काई दृश्यों में खुद सैनी की आंख बन जाता है, जिसमें दर्शक को ऐसा लगता है कि जैसे वह खुद युद्ध भूमि में है और युद्ध कर रहा है। यह कहानी एकादम से असली लगती है। सस्पेंस या टेंशन को बनाए रखने में बैकग्राउंड म्यूजिक भी बहुत ज्यादा शानदार भूमिका निभाता है। कुछ देखा बिना किसी संगीत के रखे गए हैं तकी युद्ध की खामोशी और डर साफ-साफ महसुस हो। यह एक बहुत अच्छा रचनात्मक निर्णय होता है।

एक्टिंग ( Acting):

फिल्में सभी कलाकारों ने अपने किरदार को बड़े ही रियल और नेचुरल तरीके से निभाया है। खास बात यह है कि कैप्टन अर्जुन सिंह का किरदार बहुत ही दमदार निकला है। इसका केदार तो गजब का है। उनके चेहरे पर मिशन का दबाव साथियों के प्रति जिम्मेदारी और देश के प्रति प्रेम साफ-साफ आप लोगों को यह फिल्म में दिखाएगा। जब स्क्रीन पर यह साथ आते हैं तो सीन अपने आप बहुत ही ज्यादा दमदार हो जाता है। ऐसा लगता है कि फिल्म में जान आ गया है।

एक्शन और सिनेमैटोग्राफी:

फिल्म की साइन में तो ग्राफ ही बहुत ज्यादा कमाल की है। पहाड़ी इलाके और बर्फीले रास्ते को कैमरे ने बहुत ही जबरदस्त तरीके से कैप्चर कर लिया है। रात के समय के कुछ-कुछ दृष्टि इतनी ख़ूबसूरत देखे हैं कि मानो असली युद्ध हो रहा है। एक्शन पापों में ओवरडोज बिल्कुल भी नहीं है। यानी कि विनाशकारी धमाके झाड़ियां उजाड़ती हुई या फिल्म नायक की तरह 10-10 दुश्मनों को मरने वाला एक्सप्रोच नहीं लिया गया। हरसिन यथार्थवादी लगता है। गोली चलाने की आवाज ग्रेनेड फटने की, सब कुछ बहुत ही ज्यादा नेचुरल लगता है। जैसा कि एक रियल घाटना घटता है उसी प्रकार की फिल्म में हुआ है।

संगीत और पृष्ठभूमि स्कोर:

अगर हम गाने के खराब करें तो ये फिल्म में गाना ज्यादा नहीं है और जो है वो कहानी के फूल कि तोड़ते नहीं। खासकर देश के 120 गीत फिल्म का दिल बन जाता है। बैकग्राउंड स्कोर बहुत ही ज्यादा है उम्मीद और वीरता को बेहतर तरीके से बढ़ाता है और दिखाता भी है।

संपादन और VFX:

फिल्म की एडिटिंग बहुत ही ज्यादा मस्त है – अगर बात करें तो फालतू देखी का तो इसमें कुछ भी फालतू नहीं देखा गया। फिल्म लगभाग ढाई घंटे की है लेकिन गति बहुत ज्यादा अच्छी है कि दर्शक बोर ना हो। क्या फिल्म में कमियां भी हैं? हर फिल्म में कुछ ना कुछ कमियां जरूर होती हैं और 120 बहादुर भी इससे अछूता नहीं है। कुछ जगह पर कहानी थोड़ी उत्पाद तालिका हो जाती है लेकिन बहुत अच्छी है। दुश्मन के किरदार को थोड़ा और मजबूत दिखाना था, इसमें थोड़ा नॉर्मल हो गया है। जब यह फिल्म आखरी 15 मिनट में थोड़ी जल्दी जल्दी खत्म हो गई। लेकिन इसके बावजूद फिल्म आपको बहुत ज्यादा धमाकेदार लगेगी। आप यह फिल्म अगर शुरू के आधे घंटे देख लेंगे तो पूरी कहानी समझ में आने लगेंगे और आप आखिरी क्षणों को भी जरूर देखेंगे।

देखे या नहीं:

मेरा आखिरी फैसला यह है कुल मिलाकर 120 बहादुर 1 दिल को छू लेने वाली फिल्म है। या फिल्म आप लोगों को 100% असली स्टिक और दमदार लगेगी। यह ना केवल देश भक्ति का जज्बा जगाती है बाल्की हमें सैनिकों के जीवन को करीब से समझने का मौका भी मिल जाता है, कि किस प्रकार से सैनिक के जीवन रहता है। हम आप लोगों से बस यही कहेंगे कि अगर आप लोग देश के प्रति प्रेम रखते हैं तो यह फिल्म एक बार जरूर देखें।

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